Wednesday, February 14, 2018

valentine day par youaon ke liye sandesh ! माई - बाप के करनी !


    माई - बाप के करनी !
माई - बाप के करनी कभी न भुलाई ,
जे एके भुलि जाई ,कभी सुख न पाई।
सारा सुख त माई - बाप के अचरे बा ,
जहां माई - बाप नइखे ,सब खतरे बा।
जे समझी ,माई - बाप के ना रुलाई ,
माई - बाप के......... ......न भुलाई। १।
देश में रहीं या परदेशे हीं जाई ,
माई - बाप के यादि ,हर जगहे आई।
जीवनभर रउवां कतनों करीं कमाई ,
माई - बाप के कमी ,पुरा न हो पाई।
जे समझी ,माई - बाप के ना रुलाई ,
माई - बाप के......... ......न भुलाई। २।
माई - बाप के गोद में हीं जन्नत बा ,
ओकरे पास हीं प्यार भरल दौलत बा।
माई - बाप के सेवा से सबकुछ मिली ,
जे ओकरा के ठुकराई ,उ दुःख झेली।
जे समझी ,माई - बाप के ना रुलाई ,
माई - बाप के......... ......न भुलाई।३।
- Bharat mishra prachi, journlist jaipur

Tuesday, January 30, 2018

भूल गइल त्योहार

भूल गइल त्योहार
छूटल गांव ,भूल गइल त्योहार
ढ़ूंढ़त रहनी गांव जइसन प्यार,
छूटल गांव ,भूल गइल त्योहार।1।
चिउरा,दही,तिलवा,भुजा छूटल ,
छूट गइल सब हीत न्योतोहार ।
शहर में जहवां हम रहत बानी ,
ओहिजा बा सभी के मनमानी ।
तरस गइनी पावे खातिर प्यार ,
छूटल गांव ,भूल गइल त्योहार। 2 ।
सब शहर के बा एके कहानी ,
जहां शुद्ध नइखे हवा व पानी ।
हर दिन होते रहेला तकरार ,
छूटल गांव ,भूल गइल त्योहार।3 ।
अगल बगल के ना जाने कोई ,
मतलब के हीं वहां दोस्त होई ।
पड़ोस चिन्हें से करे इन्कार ,
छूटल गांव ,भूल गइल त्योहार। 4 ।
- भरत मिश्र प्राची, पत्रकार , जयपुर