Friday, April 16, 2010

जीवन परिचय बृत

नाम :- भरत मिश्र प्राची
पिता :- श्री बृज किशोर मिश्र
जन्म :- १२ जुलाई १९५३
जन्म स्थान :- बड़का गाँव , बक्सर , बिहार
निवास :- सन १९७५ से निरंतर राजस्थान में
संपर्क सूत्र :- डी- ९ सेक्टर - ३ ऐ , खेतड़ी नगर -३३३५०४ , झुंझुनूं , राजस्थान
मोब :- ०९४१४५४१३२६, ०९४६०५४०७२७ दूरभाष :- ०१५९३-२२०३२६
संपर्क जयपुर :- ऐ -४, गायत्री नगर, सोडाला
दूरभाष :- ०१४१- ५१३१५५२ मोब- ९३१४९०८२२१
शिक्षा / उपाधि :- स्नातक (कला ) , साहित्य रत्न , विद्या वाचस्पति (मानद)
रूचि :- सृजन , पत्रकारिता , कवित्ता पाठ, लेखन , संचालन, सामाजिक कार्य
सृजन
प्रकाशित आलेख :- दैनिक हिंदुस्तान ,राजस्थान पत्रिका , भास्कर , जागरण ,सन्मार्ग ,स्वतंत्र वार्ता , रांची एक्सप्रेस , हरि भूमि ,जलते दीप, डेली न्यूज़ , नव जयोति ,बिजनोर टाइम्स,चमका आइना , चर्चित दुनिया , उतर उज्जाला, आदि के सम्पादकीय पृष्ट .
प्रकाशित कहानिया :- राजस्थान पत्रिका के रविवार , परिवार अंक सहित देश की चर्चित अन्य पत्र -पत्रिका में
प्रकाशित कृत्तियाँ
उपन्यास :- अधूरी प्यास , मोह भंग , भोर की तलाश
कविता संग्रह :- जीवन ज्योति , सूरज को उगने दो
निबंध संग्रह :- सत्ता संगर्ष , शून्य काल , गुलामी की ओर बढ़ते कदम
डॉ भरत मिश्र प्राची - एक सर्जनात्मक व्यकित्तव :-संपादक - डॉ यदुवीर सिंह खिरवार
प्रकाशनाधीन कृत्तियाँ
संस्कार ( कहानी संग्रह ), लाभ तंत्र ( निबंध संग्रह )
डॉ प्राची के निबंधो में समकालीन बोध :- लेखक - डॉ दीना नाथ सिंह
संपादन
भारतीय जनभाषा की विशिष्ट त्रैमासिक पत्रिका कंचन लता का १९८६ से संपादक पद पर अवैतनिक कार्य
दायित्व
संयोजक - हिंदी साहित्य परिषद् , खेतडी नगर , महा मंत्री - भोजपुरी सांस्कृतिक समिति ,
सम्मान
२० अगस्त १९९५ , पटना , बिहार में आयोजित अखिल भारतीय साहित्य सम्मलेन में अंग माधुरी रजत
२ अक्टू १९९५ , युवा साहित्य मंडल , गाजियाबाद (ऊ प ) द्वारा सृजन सम्मान
२६ अक्टू १९९७ , हिंदी साहित्य सम्मलेन , गाजियाबाद में पद्म श्री चिरंजीत द्वारा अति विशिष्ट सम्मान
सन १९९८ में बाबा आंबेडकर संस्था बनवास में तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री द्वारा शेखावाटी गौरव सम्मान
१४ सितम्बर १९९९ में महावीर सेवा संस्था , प्रताप द्वारा साहित्य शिरोमणि सम्मान
३१ अक्तू १९९९ में अखिल भारतीय साहित्य सम्मलेन , गाजियाबाद में आचार्य महावीर प्रसाद दिव्वेदी
५ जनवरी २००० को गुजरात हिंदी विद्यापीठ के आयोजित समारोह में राज्यपाल द्वारा शांति साधना सम्मान
वर्ष २००० में अमेरिकन ब्योग्रफिकल विभाग द्वारा men ऑफ दी इयर की उपाधि
८ मार्च २००० को अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मलेन , मैनपुरी द्वारा सम्पादक रत्न
२२ अप्रैल २००० को गाजियाबाद में आयोजित अखिल भारतीय राजभाषा सम्मलेन में राजभाषा मनीषी
२१मई 2000 को साहित्यिक ,सांस्कृतिक ,कला संगम अकादमी (ऊ प्रदेश ) द्वारा आयोजित भाषाई एकता सम्मलेन में आचार्य देवी दत्त शुक्ल सम्मान
२८ मई २००० को विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ ,भागलपुर के ७ वे दीक्षांत समारोह में विद्यावाचस्पति की उपाधि
१४सितम्बर 2000 को अखिल भारतीय साहित्यकार मंच , रायबरेली द्वारा रसूल अहमद अबोध सम्मान
१५ अक्तू २००० को अंकिता प्रकाशन , आसनसोल द्वारा गिरिजा कुमार माथुर सम्मान
२२ अक्टू २००० को गाजियाबाद में आयोजित हिंदी सम्मलेन में हिंदी सेवी प्रमुख सम्मान
३०जन २००१ को जिला पत्रकार समिति एता द्वारा आयोजित अखिल पत्रकार सम्मलेन में पत्रकार मनीषी
१२मार्च २००१ को शिर्डी में आयोजित नागरी लिपि सम्मेलन में पत्रवाचन के लिए नागरी लिपि सम्मान
२५ मार्च २००१ को सीकर में आयोजित पत्रकार सम्मलेन में क्विज में प्रथम पुरस्कार सम्मान
२० अप्रैल २००१ को अखिल भारतीय राष्ट्र भाषा विकास संगठन के समारोह में राष्ट्र भाषा गौरव सम्मान
१०जून २००१ को मैनपुरी में आयोजित साहित्यकार /पत्रकार सम्मलेन में पत्रकार शिरोमणि सम्मान
४अगस्त २००१ को जेमिनी अकादमी पानीपत द्वारा पद्म श्री लक्ष्मी नारायण दुबे सम्मान
१२ अक्टू २००१ को प्रज्ञा सृजनात्मक मंच द्वारा अभिनन्दन
१४ अक्टू २००१ को कृष्ण नगर नेपाल में सृजन हेतु अभिनन्दन
२५अक्तू २००१ को मानव भारतीय सांस्कृतिक समिति हिसार द्वारा साहित्य सम्मान
२८अक्तू २००१ आल इंडिया न्यूज़ पेपर एशोशिएसन द्वारा पत्रकारिता के लिए सम्मान
३मार्च २००२ को इन्दोर में आयोजित सम्मेलन में पत्रवाचन हेतु सम्मान
१८ मार्च गोंडा , झारखण्ड में आयोजित साहित्य सम्मलेन में अखिल भारतीय अंगीक कला मंच द्वारा सम्पादक शिरोमणि सम्मान
१६ फरवरी २००३ को सृजन सम्मान, छ ग , द्वारा आयोजित समारोह में महामहिम राज्य पाल दिनेश नंदन सहाय द्वारा पद्म श्री मुकुट धर पाण्डेय सम्मान
९ नवंबर २००३ को सुल्तानपुर में सरिता लोक भारती संसथानद्वारा साहित्य गौरव सम्मान
२८ जन २००४ को खगडिया ,भिहर में हिंदी भाषा साहित्य परिषद द्वारा उपन्यास भोर की तलाश के लिए राम बलि परवाना सम्मान
३१अक्त०० २००४ को शिमला में केन्द्रीय श्रम रोजगार मंत्री द्वारा पत्रकार भूषण सम्मान
२७ नवम्बर २००५ को जबलपुर ( म प्रदेश ) की साहित्यिक संस्था कादम्बरी द्वारा निबंध संग्रह सत्ता संगर्ष हेतु
ब्रम्ह्कुमार प्रफुल सम्मान
७मइ २००६ को अखिल भारतीय संगम उदयपुर द्वारा कलम कलाधर सम्मान
२२अगस्त २००७ को ऋचा रचनाकार परिषद द्वारा भारत गौरव सम्मान
१५जन२००८ को पुष्प गंध प्रकाशन द्वारा संपादक श्री सम्मान
२०जन२००८ को हिंदी भाषा सम्मलेन पटियाला पंजाब द्वारा आचार्य हजारी प्रसाद दिव्वेदी सम्मान
१८ अक्तू२००८ को श्री बाबा गरीब नाथ विद्या प्रचारणी पीठ हरियाणा द्वारा परम हंस श्री गोपालनाथ जी स्मृति सम्मान
२०दिसम्बर २००८ को जेमिनी अकादमी हरियाणा द्वारा अखिल भारतीय सम्मान के तहत राजस्थान रत्न सम्मान
२९मार्च२००९ को मुक्त मनीषा साहित्यिक सांस्कृतिक समिति डबरा (म प्रदेश ) द्वारा संत कन्हर सम्मान
२४ मई २००९ को हिंदी भाषा सम्मलेन पंजाब द्वारा काव्य कलश सम्मान

Tuesday, April 28, 2009

लोकतंत्र में आम आदमी की भूमिका


विश्व के सबसे बडे लोकतांत्रिक देश में 15वीं लोकसभा के चुनाव होने जा रहे है जहां आज आम आदमी की भूमिका एवं जिम्मेंवारियां काफी बढ़ गई हैं। लोकतंत्र के बेहतर स्वरुप के लिए बेहतर जनप्रतिनिधि का होना बहुत जरुरी हैं। स्वतंत्रता उपरान्त देश में स्थापित लोकतंत्र में आज जिस तरह के जनप्रतिनिधियों की बढ़ोतरी होती जा रही है, जिससे लोकतंत्र का स्वरुप काफी बदल चुका है, सभी भलीभॉति परिचित है। लोकतंत्र के मंदिर संसद एवं विधानसभा परिसर के बदलते हालात जनप्रतिनिधियों के वास्तविक स्वरुप को उजागर कर रहे है, जिनके प्रतिकूल आचरण से आज लोकतंत्र की मर्यादा भंग होती साफ साफ नजर आ रही है। भारतीय लोकतंत्र के बदलते स्वरुप में आज बाहुबलियों एवं अपराधिक प्रव्ृत्ति से जुड़े लोगों का बढ़ता वर्चस्व आसानी से देखा जा सकता है। आज देश के सभी राजनैतिक दल इस तरह की पृष्ठभूमि को प्रश्रय देने में किसी से पीछे नहीं दिखते। भ्रष्टाचार मिटाने की बात तो यहां सभी करते दिखते परन्तु भ्रष्ट आचरण वाले को टिकट देने में कोई नहीं हिचकते। इस दिशा में इन सभी की सोच एक जैसी ही दिखती है। जो ऐनकेन प्रकारेण लोकसभा की सर्वाधिक सीट पाने का हर संभव प्रयास करते है।
इस तरह के परिवेश की उभरती प्रारम्भिक स्थिति पर मंथन करना जरूरी है जहां से लोकतंत्र का स्वरुप प्रभावित हुआ है। स्वतंत्रता उपरान्त देश में लोकसभा के गठन के समय जनप्रतिनिधियों के चयन किये जाने की प्रक्रिया से धीरे-धीरे यहां के पूंजीपति वर्ग जुड़ते गये। चुनाव उपरान्त ये पूंजीपति वर्ग जीते हुए जनप्रतिनिधियों का प्रत्यक्ष - अप्रत्यक्ष रुप से अपने हित में उपयोग करने लग गये जिससे जनप्रतिनिधियों का स्वरुप जनहितार्थ न होकर स्वार्थमय परिवेश से जुड़ता चला गया। कुछ अंतराल के उपरान्त इस तरह के परिवेश पर देश के बाहुबलियों का प्रभाव भी हावी हो चला, जिससे लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों का प्रवेश अलोकतांत्रिक होता चला गया। अर्थबल एवं बाहुबल से प्रभावित लोकतंत्र का कायाकल्प ही बदल गया। आज के बदले इस रुप में अर्थबल एवं बाहुबल के पूर्णत: प्रभाव को देखा जा सकता है जहां इसके समर्थक संसद के अन्दर अब जनप्रतिनिधि का स्वरुप धारण कर चुके है। लोकतंत्र पर अब इन्हीं का कब्जा दिखाई देने लगा है। आज देश का कोई भी राजनैतिक दल इस तरह के परिवेश से परे नहीं है।
लोकतंत्र के बदले इस स्वरुप का खुला नजारा आज हर जगह यहां संसद से लेकर सड़क तक देखने को मिल रहा है। आज किसी भी जनप्रतिनिधि की वाणी पर कोई लगाम नहीं दिखता। संसद सत्र एवं विधानसभा सत्र के दौरान कब कौन सी यहां हरकत हो जाय, किस जनप्रतिनिधि का हाथ उठकर किसका गला पकड़ ले या कपड़ा फाड़ दे कह पाना मुश्किल हैं। सड़क से संसद तक व्याप्त जनप्रतिनिधियों की अलोकतांत्रिक हरकतें से शायद ही कोई अनभिज्ञ हो। कोई किसी पर रौलर चलाने की बात करता है तो कोई किसी का हाथ काट देने की बात करता है। कहीं मतदान के दौरान मतदाता को डराने - धमकाने की प्रक्रिया देखी जा सकती है तो कहीं मतदाता को लुभाने की प्रवृत्ति। लोकतंत्र के बदले इस हालात में मतदान निष्पक्ष हो जाय, कह पाना मुश्किल है।
आज देश में मंहगाई दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है। मंदी के दौर एवं आतंकवाद से देश अलग से ही जूझ रहा है। क्षेत्रवाद की लहर पग पसारती जा रही है। लोकतंत्र में अपराधी, असमाजिक, बाहुबली, का प्रवेश तेजी से जारी है। ऐसे समय में लोकतंत्र में आम आदमी की भूमिका काफी महत्वपूर्ण बन जाती है। वह किसे अपना जनप्रतिनिधि बनाता है। यह आदमी की सोच एवं उसके विवेक पर निर्भर करता है। उसकी सकरात्मक सोच ही लोकतंत्र के बिगड़ते स्वरुप को बेहतर ढ़ंाचा में ढ़ाल सकती हैं। 16 अप्रेल से देश में लोकसभा चुनाव की मतदान प्रक्रिया शुरू हो गई है जो 13 मई तक जारी रहेगी। इस दौरान उड़ीसा एवं आंध्रप्रदेश के विधानसभा चुनाव भी होने जा रहे है। इस चुनाव के दौरान देश का आम आदमी सही लोकतंत्र की स्थपना में कितना जागरुक हो पाता है, यह चुनाव उपरान्त ही पता चल पायेगा। पर लोकतंत्र की सही तस्वीर आम आदमी की सजगता एवं सकरात्मक भूमिका पर ही निर्भर है।